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चल ढूंढ़ते हैं , सफरनामा एक नया
पत्थर की मूरतों को इंसान बनाते हैं
इक बस हंसी तू फूंकना , कुछ रंग छिड़कू मैं
चल मिलके , इक नया गुलिस्तां बनाते हैं !

चल तोड़ते हैं आज ये , दीवार-ए-अजनबी
चल मिलके एक नया खुशनुमा जहाँ बनाते हैं !
शिकायत न हो तुझे , न मुझे, की मैं बदल गया
नक्काशी करके , आइना-ए-इमान बनाते हैं !

बिखरे हुए तिनके हैं, जो चल मिलके समेटते हैं
सादी सी डोरियों में थोड़ा रंग लपेटते हैं
चल दुरुस्त करते हैं, तस्सवुर कुछ इस कदर ,
क़ुत्बों में कौंसे हो जड़ें, वो अंजाम बनाते हैं !

परवाज़ न तेरी रुके, न मेरी चढ़े सलीब पे
चल उड़ान भरते हैं , और एक नया आसमान बनाते हैं !

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penpaperandheart Podcast🖋📜❤
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Anjana
Anjana
10 months ago

good one 👍

निशा कौशिक पाराशर
निशा कौशिक पाराशर
10 months ago

बहुत बढ़िया

George.j
George.j
10 months ago

Good one. Iam expecting more from you… Really nice…

babbu
babbu
10 months ago

Bahut acche