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चल ढूंढ़ते हैं , सफरनामा एक नया
पत्थर की मूरतों को इंसान बनाते हैं
इक बस हंसी तू फूंकना , कुछ रंग छिड़कू मैं
चल मिलके , इक नया गुलिस्तां बनाते हैं !

चल तोड़ते हैं आज ये , दीवार-ए-अजनबी
चल मिलके एक नया खुशनुमा जहाँ बनाते हैं !
शिकायत न हो तुझे , न मुझे, की मैं बदल गया
नक्काशी करके , आइना-ए-इमान बनाते हैं !

बिखरे हुए तिनके हैं, जो चल मिलके समेटते हैं
सादी सी डोरियों में थोड़ा रंग लपेटते हैं
चल दुरुस्त करते हैं, तस्सवुर कुछ इस कदर ,
क़ुत्बों में कौंसे हो जड़ें, वो अंजाम बनाते हैं !

परवाज़ न तेरी रुके, न मेरी चढ़े सलीब पे
चल उड़ान भरते हैं , और एक नया आसमान बनाते हैं !

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penpaperandheart Podcast🖋📜❤
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Anjana
Anjana
7 months ago

good one 👍

निशा कौशिक पाराशर
निशा कौशिक पाराशर
7 months ago

बहुत बढ़िया

George.j
George.j
7 months ago

Good one. Iam expecting more from you… Really nice…

babbu
babbu
7 months ago

Bahut acche